अलीगढ़, दिसम्बर 2 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। निजी अस्पताल में भर्ती महिला को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के प्रकरण ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि खून चढ़ाने से पूर्व रैपिड जांच हुई थी, तब संक्रमण नजर नहीं आया। तर्क यह है कि डोनर उस समय विंडो पीरियड में था। इस अवधि में संक्रमण का पता नहीं चलता। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि जब 'विंडो पीरियड' में संक्रमण पकड़ में ही नहीं आता तो ऐसे खून को कैसे सुरक्षित माना जा सकता है? सवाल सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मरीजों की सुरक्षा का है। जेल रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती महिला को बी पॉजिटिव ग्रुप वाले जिस खून की यूनिट चढ़ाई गई, वह उसके जीजा का ही था। 30 जून को महिला के जीजा ने मलखान सिंह जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रैपि...
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