नई दिल्ली, जनवरी 29 -- जोधपुर की जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया। वांगचुक ने कहा कि 'अरब स्प्रिंग' की तरह सरकार को उखाड़ फेंकने वाले बयान उन्होंने नहीं दिए। कार्यकर्ता ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें आलोचना और विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष यह तर्क दिया कि पुलिस ने हिरासत में भेजने वाले प्राधिकारी को गुमराह करने के लिए चुनिंदा वीडियो का सहारा लिया है। सिब्बल ने पीठ को बताया कि वीडियो देखिए। पुलिस के मुताबिक, वह कह रहे हैं कि अगर भारत सरकार राज्य का दर्जा नहीं देगी, तो वह अरब स्प्रिंग की तरह सरकार को उखाड़ फेंकें...