मुजफ्फरपुर, जनवरी 8 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। गोला रोड स्थित श्री दुर्गा स्थान मंदिर में आयोजित भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को बाल संत पीयूष गिरी ने कहा कि सत्संग की महिमा एवं आधे क्षण का सत्संग हजारों वर्षों की तपस्या से भी श्रेष्ठ है। प्रसंग में महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र का उदाहरण देते हुए समझाया कि कैसे वशिष्ठ मुनि ने पूरी पृथ्वी को आधे क्षण के सत्संग से धारण कर लिया और दस हजार वर्षों की तपस्या का फल देकर भी विश्वामित्र मुनि धारण नहीं कर पाए। कथा में आत्मदेव ब्राह्मण के प्रसंग में संन्यासी द्वारा ज्ञान का उपदेश, धुंधकारी और गोकर्ण महात्मा का जन्म वृतांत श्रवण कराया। जब तक मनुष्य दूसरे के गुण और दोषों को देखना बंद नहीं करता, तब तक उसका आवागमन का चक्र नहीं छूटता। पीयूष गिरि ने बताया कि जब गोकर्ण ने अपने पिता आत्मदेव को ...