वाराणसी, फरवरी 2 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ही एक ऐसा संगठन है, जो अपनी वर्षगांठ नही मनाता, बल्कि आत्मावलोकन करता है, कि जो लक्ष्य निर्धारित था, वह प्राप्त हुआ या नहीं। प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय समन्वयक जे. नंद कुमार ने सोमवार को यह बातें कहीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित 'पंच परिवर्तन एवं भविष्य का भारत' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन समारोह में वह मुख्य अतिथि रहे। आईसीएसएसआर नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित संगोष्ठी में जे. नंद कुमार ने कहा कि यह शताब्दी सिर्फ एक संगठन का सौ वर्ष नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। यह नवोत्थान का क्षण है, यह प्रतिमान परिवर्तन का क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की आ...
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