रांची, दिसम्बर 18 -- रांची, संवाददाता। झारखंड जनाधिकार महासभा ने गुरुवार को प्रेस क्लब रांच में आयोजित प्रेसवार्ता में वन अधिकार कानून 2006 के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। महासभा ने कहा कि कानून लागू हुए 17 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन राज्य के वन आश्रित समुदायों को अब तक इसका समुचित लाभ नहीं मिल पाया है। महासभा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कानून में ग्राम सभा को सबसे महत्वपूर्ण प्राधिकारी माना गया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उसे दरकिनार किया जा रहा है। वन अधिकार दावों के भौतिक सत्यापन में वन विभाग द्वारा अनधिकृत हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे हजारों दावे निरस्त या सीमित कर दिए गए हैं। सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार नहीं महासभा ने बताया कि धारा 3(1)(झ) के तहत जंगल के संरक्षण, संवर्धन और प्रबं...