रांची, फरवरी 24 -- रांची। अबुआ दिशोम बजट से राज्य के अधिवक्ता समुदाय को इस बार भी भारी निराशा हाथ लगी है। लंबे समय से लंबित मांगों जैसे-अधिवक्ता कल्याण कोष, पेंशन योजना, स्वास्थ्य बीमा और कोर्ट परिसरों में चैंबर निर्माण को लेकर बजट में कोई विशेष बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। अधिवक्ताओं का मानना है कि न्याय व्यवस्था की मजबूती की बातें तो की जाती हैं, लेकिन इस व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ वकीलों की बुनियादी समस्याओं और सामाजिक सुरक्षा की लगातार अनदेखी हो रही है। :: कोट :: युवा वकीलों को मासिक स्टाइपेंड और वेलफेयर फंड की उम्मीद थी। शुरुआती आर्थिक सहयोग के अभाव में कई प्रतिभाशाली युवा वकालत छोड़ने को विवश हो रहे हैं। - हरशिखा कुमारी, अधिवक्ता अधिवक्ता सुरक्षा कानून और बुनियादी सुविधाएं वकीलों की प्राथमिक जरूरत हैं। सरकार को वकीलों की सामाज...
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