भागलपुर, फरवरी 5 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता आर्थराइटिस (गठिया) केवल मरीजों के जोड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहा है, बल्कि मरीजों के फेफड़ों का आकार भी छोटा यानी सिकुड़ा भी रहा है। गठिया के मरीजों के फेफड़े सिकुड़ने की बीमारी से डॉक्टर भी चिंतित है। चिंता की बात यह है कि यह मरीज चेस्ट रोग विभाग में उस समय पहुंच रहे हैं, जब फेफड़ा इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) का शिकार हो जा रहा है, जिसका इलाज संभव नहीं है। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (मायागंज अस्पताल) के टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग में सात से आठ मरीज हर माह इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जब सांस लेने में होती है तकलीफ, तब पहुंचते हैं इलाज को मायागंज अस्पताल के टीबी एंड चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. बीरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि आर्थराइटिस के मरीजों को फेफड़े में दिक्कत तब होती ह...