रांची, दिसम्बर 13 -- रांची। विशेष संवाददाता न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम नागरिक के जीवन में उसकी अनुभूति होनी चाहिए। लोक अदालत, विधिक सहायता और सशक्तिकरण के माध्यम से न्यायपालिका समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने शनिवार को दुमका के कन्वेंशन सेंटर से राज्य में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन करते हुए यह बातें कही। चीफ जस्टिस ने कहा कि लोक अदालत जैसे मंच न केवल विवादों का त्वरित समाधान करते हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को भी मजबूत बनाते हैं। विधिक सेवाएं अब केवल निःशुल्क कानूनी सहायता तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि नागरिकों के समग्र सशक्तिकरण का माध्यम बन चुकी हैं। उन्होंने सभी संस्थाओं से समन्वय और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए...