नई दिल्ली, जुलाई 3 -- बिहार विधानसभा चुनावों से महज दो-तीन महीने पहले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन की भारत निर्वाचन आयोग की कवायद न केवल संदेहास्पद, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की नींव पर सीधा हमला है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव इसी मतदाता सूची के आधार पर कराए गए। अब अगर वह सूची गलत थी, तो क्या उसी सूची के आधार पर बनी सरकार की वैधता पर सवाल नहीं उठता? यदि वास्तव में मतदाता सूची में कोई सुधार करना था, तो यह लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद और पूरे देश में समान रूप से किया जा सकता था। सिर्फ बिहार को क्यों 'टारगेट' किया गया? जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 मतदाता सूची में नामों को शामिल करने और हटाने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित करता है। यह सांप्रदायिक या अटकलबाजी के आधार पर 'विशेष' संशोधनों को अधिकृत नहीं करता है। इस अभ्यास के पीछे कोई वैज्ञानिक या ...
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