चतरा, फरवरी 17 -- मयूरहंड प्रतिनिधि झारखंड में आज नगर निगम चुनाव का शोर है। भले ही तकनीकी रूप से यह चुनाव दलगत आधार पर नहीं हो रहे हैं, लेकिन हकीकत किसी से छिपी नहीं है। हर चौक-चौराहे पर राजनीतिक पार्टियों के झंडे लहरा रहे हैं और दिग्गज नेता अपने-अपने समर्थित प्रत्याशियों के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। लेकिन जब बात पंचायत चुनावों की आती है, तो यही राजनीतिक दल और उनकी सक्रियता गायब हो जाती है। नगर निगम चुनावों में मेयर या पार्षद पद के लिए पार्टियों की इस गहरी दिलचस्पी के पीछे सीधा गणित फंड और पावर का है। मेयर बनने का मतलब है शहर की बड़ी योजनाओं और अरबों के बजट पर सीधा नियंत्रण। जहाँ सत्ता का आकर्षण और बड़ा फंड होता है, वहाँ राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो जाती है। इसके विपरीत, जब गांव की सरकार यानी जिला परिषद, मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस...
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