नई दिल्ली, जुलाई 31 -- प्रभात कुमार नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि 'दलबदल राष्ट्रीय बहस का मुद्दा रहा है और यदि समय रहते इसे प्रभावी ढंग से नहीं रोका नहीं गया तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर सकता है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए संसद को संविधान की 10वीं अनुसूची के उन प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है जो सदन के अध्यक्ष को दलबदल के आधार पर विधायक की अयोग्यता पर निर्णय लेने का कार्य सौंपते हैं। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि '52वें संशोधन के जरिए संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसका मकसद अध्यक्ष को निर्णय लेने वाला प्राधिकारी बनाना था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अयोग्यता याचिकाओं को नियमित अदालतों में प्रक्रियात्मक देर...
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