उन्नाव, दिसम्बर 15 -- दर्द से कराहते मरीज, गोद में बच्चे और आंखों में उम्मीद लिए परिजन...सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का रोज का यह दृश्य अब आम हो गया है। डॉक्टरों की लेटलतीफी और जल्दबाजी में की जा रही जांच ने मरीजों के सब्र की भी परीक्षा लेनी शुरू कर दी है। कुछ केंद्रों में एक्स-रे और दवा केंद्र भी बंद मिले। जिन केंद्रों से राहत और भरोसे की उम्मीद होती है, वहीं मरीज खुद को असहाय और उपेक्षित महसूस करने को मजबूर हैं। यह नजारा सोमवार को आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की पड़ताल के दौरान देखने को मिला। डॉक्टर मिले न दवाएं, फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल बिछिया। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करने वाले बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की हकीकत मरीजों और तीमारदारों के सामने कुछ और ही बयां करती है। सोमवार सुबह 10 बजे निर्धारित ओपीडी समय होने...
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