मुजफ्फरपुर, जनवरी 29 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुशहरी के वैज्ञानिक लीची के पत्तों और फलों पर आर्सेनिक के असर पर शोध करेंगे। मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्र के पानी में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने की रिपोर्ट को देखते हुए वैज्ञानिक इस अध्ययन को जरूरी मान रहे हैं। दरअसल, किसान लीची बगानों की सिंचाई तालाब या नदी के पानी से नहीं करते हैं, क्योंकि उनके बगान में तालाब या नजदीक में नदी नहीं है। सिंचाई के लिए वे पंपिंग सेट पर निर्भर हैं। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुशहरी के निदेशक डॉ. बिकास दास ने बताया कि मुजफ्फरपुर और आसपास के पानी में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ना चिंता का विषय है। इसी को देखते हुए लीची के पत्ते और फल में भी आर्सेनिक की मात्रा जांची जाएगी। साथ ही लीची से तैयार शहद पर भी शोध किया जाएगा। बत...
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