नई दिल्ली, जनवरी 9 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की पेंशन में की गई 50 फीसदी की कटौती के फैसले को रद्द कर दिया है। यह सजा उसे इसलिए दी गई थी क्योंकि उसने बिना तलाक लिए अपनी 'लिव-इन पार्टनर' का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में पत्नी के तौर पर दर्ज कराने की कोशिश की थी। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी के इस कदम को 'गंभीर कदाचार' नहीं माना जा सकता। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक वीरेंद्र सिंह कुंवर नाम के इस कर्मचारी की शादी 1981 में हुई थी, लेकिन 1983 में उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गईं और तलाक देने से भी मना कर दिया। 1990 में पत्नी की शिकायत पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई थी और वेतन में कटौती की गई थी। तब पत्नी ने उसके खिलाफ परिवार को छोड़ दूसरी महिला के साथ रहने की शिकायत दर्ज कराई थी। यह भी पढ़ें: मां ज्यादा कमाती हो तब भी भरण-पोषण...
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