वाराणसी, जनवरी 31 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। साहित्य कभी समय की सीमा में नहीं बंधता। जो समय की सीमा में बंध जाए वह साहित्य ही नहीं है। मैं बनारस में हूं। इस धरती पर कालजयी साहित्य रचने वाले बड़े-बड़े पुरोधा हुए। मुंशी प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद सबसे सशक्त उदाहरण हैं। यह कहना है देश के ख्यात कवि, आलोचक और निबंधकार अशोक वाजपेयी का। वह शनिवार को बनारस लिट् फेस्ट के दूसरे दिन शनिवार को होटल ताज के दरबार हॉल में अपनी पुस्तक 'एक पतंग अनंत में' पर व्योमेश शुक्ल के साथ संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ रचनाएं केवल अपने युग या सामाजिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहतीं। उनका प्रभाव समय के साथ कभी कम नहीं होता। प्रेमचंद ने जिन- जिन प्रश्नों की ओर इशारा किया है वे अब भी हमारे इर्द-गिर्द हैं। साहित्य भावनाओं, अनुभवों और सत्य को इतनी गहराई से व्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.