वाराणसी, फरवरी 1 -- वाराणसी,मुख्य संवाददाता। लेखन के डिजिटल तौर तरीकों ने रचनात्मकता और संवेदनशीलता दोनों को प्रभावित किया है। वास्तविकता यह कि जमीनी अनुभवों से गुजरकर ही सच्ची और जीवंत कहानियां जन्म लेती हैं। स्मृतियां ही लेखन की आत्मा होती हैं। जब हम उन्हें सहेजते हैं तभी साहित्य में गहराई और सच्चाई उपजती है। यह कहना है प्रख्यात लेखिका नमिता गोखले का। वह बनारस लिट् फेस्ट के अंतिम दिन रविवार को संवाद कर रही थीं। इतिहासकार बद्री नारायण के साथ हुए संवाद में उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल स्क्रीन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। कलम से कागज पर लिखा अनुभव स्मृति में अधिक गहराई से उतरता है। एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मेरा लेखन विभिन्न पीढ़ियों की चेतना और दृष्टि को केंद्र में रखता है। हर पीढ़ी दुनिया को अपने अनुभव और समय के चश्मे से देखती है। साह...
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