वाराणसी, फरवरी 1 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। संत रविदास काशी की सांस्कृतिक पहचान हैं। भक्ति साहित्य के विकास में संत रैदास की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। दुखद यह कि काशी के इतिहास में जिस प्रमुखता के साथ उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को दर्ज किया जाना चाहिए था वह नहीं किया गया। यह कहना है बीएचयू के प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल का। वह बनारस लिट् फेस्ट के अंतिम दिन रविवार को होटल ताज में अपनी पुस्तक 'भक्ति का लोकवृत्त और रविदास की कविताई' पर डॉ.विंध्याचल यादव के साथ चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि काशी के इतिहास पर सबसे प्रामाणिक दो पुस्तकें मानी जाती हैं। एक तो मोतीचंद लिखित काशी का इतिहास और दूसरी कुबेरनाथ सुकुल की पुस्तक वाराणसी वैभव है। वाराणसी वैभव में तो कहीं-कहीं उल्लेख किया गया है लेकिन काशी का इतिहास में रविदास का नाम तक नहीं जबकि संत कबीर ...
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