वाराणसी, फरवरी 1 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भारतीय कला और परंपरा की गहराइयों को समझने और समकालीन दृष्टि से जोड़ने का अवसर भी बनारस लिट् फेस्ट के दूसरे दिन शनिवार को मिला।'भारतीय कला, परंपरा, प्रयोग और समकालीन दृष्टि' विषयक सत्र में देश के दिग्गज चित्रकारों ने अपने मंतव्य रखे। ललित कला अकादमी से जुड़े 'साहित्य कला पुरस्कार' से सम्मानित चित्रकार एमएस. मूर्ति ने कहा कला अक्षरों की माता है। उन्होंने अपनी 25 एकल प्रदर्शनियों के अनुभव साझा किए। बताया कि उनकी कला पर बौद्ध परंपरा का गहरा प्रभाव है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो.सुनील कुमार विश्वकर्मा ने अपनी पुस्तक 'कोई देखता रहा' का उल्लेख करते हुए समाज को एक नया दृष्टिकोण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभ्यता धन और व्यवसाय का प्रतीक है जबकि संस्कृति धर्म और नैतिक मूल्यों का आधार है। मिथ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.