नई दिल्ली, अगस्त 11 -- दिल्ली की एक अदालत ने 2019 में एक नाबालिग लड़के के साथ कुकर्म करने के जुर्म में एक आदमी को 15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि केवल लड़कियों के साथ ही यौन उत्पीड़न होना एक मिथक है। लड़के भी इस जघन्य अपराध के लिए समान रूप से संवेदनशील होते हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनु अग्रवाल उस आदमी के खिलाफ सजा पर बहस सुन रही थीं, जिसे पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) और आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध) के तहत दोषी ठहराया गया था। 31 जुलाई के आदेश में अदालत ने कहा कि लड़के भी लड़कियों की तरह यौन उत्पीड़न और शोषण के प्रति संवेदनशील हैं। वे भी यौन हमले के जघन्य अपराध के प्रति समान रूप से संवेदनशील हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि केवल लड़कियों को ही यौन हमले का शिकार होना पड़ सकता है। हालांकि,...
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