भागलपुर, फरवरी 6 -- कजरा। आवाज-ए-सिरीश शाडिल्य के संस्थापक सह अधिवक्ता सिरीश कुमार शांडिल्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर भारत में धार्मिक और जातीय आधार पर होने वाली जनगणना को रोकने की मांग की है। पत्र में उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि संविधान धर्म और जाति के आधार पर जनगणना की इजाजत नहीं देता है। हालांकि, जनगणना अधिनियम 1948 के तहत स्वतंत्र भारत में वर्ष 1951 से धार्मिक आंकड़े एकत्र किए गए हैं। शांडिल्य ने कहा कि सरकार इस अधिनियम के तहत 2026 में होने वाली जनगणना में धार्मिक और जातीय आंकड़े एकत्र करने का निर्णय ले रही है, जो संविधान का उल्लंघन है। उन्होंने इस पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई और सरकार से इस प्रक्रिया को रोकने की अपील की।
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