उन्नाव, दिसम्बर 6 -- उन्नाव। नवंबर में सड़क सुरक्षा माह मनाकर जागरूकता का ढोल पीटा गया। जमीनी हकीकत यह है कि लखनऊ-कानपुर हाईवे खुद हादसों को दावत दे रहा है। बिना संकेतक वाले डिवाइडर, गायब रिफ्लेक्टर, अवैध कट और अधूरा निर्माण, सब मिलकर इस व्यस्ततम हाईवे को एक खतरनाक जाल में बदल चुके हैं। कोहरे की दस्तक के साथ खतरा कई गुना बढ़ चुका है, मगर जिम्मेदार विभाग चैन की नींद सो रहे हैं। अब सुबह-शाम लखनऊ-कानपुर हाईवे कोहरा निगलने लगा है। शुरुआती हल्के कोहरे के बाद घना कुहरा किसी भी समय अचानक दृश्यता शून्य कर सकता है। ऐसे में बिना संकेतक वाले खतरनाक डिवाइडर जानलेवा साबित हो रहे हैं। करीब एक करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर खर्च कर इस हाईवे को नया रूप देने की कवायद 11 महीने से चल रही है, लेकिन काम की सुस्ती यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही है। हाईवे पर बने क...