भागलपुर, अक्टूबर 29 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता। देश में हर छह सेकेंड में कोई न कोई ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हो रहा है। हर चार मिनट में स्ट्रोक के कारण एक की जान जा रही है। सर्दियों में बिहार समेत उत्तर भारत में ब्रेन स्ट्रोक के मामले तकरीबन दोगुने हो जाते हैं। ब्रेन स्ट्रोक एक ऐसी बीमारी है, जिसके शिकार व्यक्ति की अगर जिंदगी बच भी जाती है तो उसके शरीर का आधा हिस्सा बेजान हो जाता है। जिसमें जान डालने के लिए फिजियोथेरेपी का सहारा लोग लेते हैं, लेकिन तब भी शत-प्रतिशत रिकवरी नहीं हो पाती है। वहीं अगर हम विशेषज्ञ चिकित्सकों की माने तो अगर स्ट्रोक होने के साढ़े चार घंटे के अंदर (गोल्डन ऑवर) में मरीज को अस्पताल पहुंचा दिया जाये तो 90 प्रतिशत स्ट्रोक से होने वाली मौतों को न केवल रोका जा सकता है, बल्कि ब्रेन स्ट्रोक से होने वाले शारीरिक नुकसान को बह...
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