विधि संवाददाता, फरवरी 14 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में वर्षों से लंबित चार्जशीट पर रिपोर्ट दाखिल करने में लापरवाही बरतने पर प्रदेश के अधिकतर जिला जजों पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेशों की अनदेखी न्यायिक अनुशासन और न्याय व्यवस्था की बुनियाद को प्रभावित करती है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने प्रयागराज की उर्मिला मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को प्रदेश के सभी जिला जजों को एक सप्ताह के भीतर ऐसी चार्जशीट की वर्षवार जानकारी देने का निर्देश दिया था, जिनमें वर्ष 2004 से 2024 तक आरोप तय नहीं हुए हैं। प्रत्येक आपराधिक न्यायालय से अलग-अलग आंकड़े देने को कहा गया था। कोर्ट को 75 में से 49 जिलों से रिपोर्ट प्राप्त हुई। गोंडा और बरेली ने समय विस्तार मांगा। 26 जिलों से कोई रिपोर्...