मुजफ्फरपुर, मई 16 -- मुजफ्फरपुर। महिलाओं के हक में कई कानून होने के बाद भी जिले की कामकाजी महिलाएं समस्याओं से जूझ रही हैं। कहां फरियाद करें, इसकी जानकारी नहीं होने के कारण आवाज नहीं उठा पातीं। इनका कहना है कि घरेलू हिंसा, शोषण के मामलों में अगर कोई महिला न्याय पाने के लिए हिम्मत भी जुटाती है तो एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर में इतना दौड़ा दिया जाता है कि थक-हार कर इंसाफ की आस ही छोड़ देती है। हेल्पलाइन से लेकर वन स्टॉप सेंटर तक आज भी उनकी पहुंच बहुत कम है। बसों में छेड़खानी जैसी घटनाओं का सामना करना रोजमर्रा की परेशानी बन गई है। इनकी अपेक्षा है कि दफ्तरों में महिलाओं की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई, जिले से प्रखंड तक पिंक बसों का परिचालन और जागरूकता कार्यक्रम पर जोर दिया जाए तो स्थिति में बदलाव मुमकिन है। जिले के ग्रामीण इलाकों की सैकड़ों कामका...
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