सहारनपुर, फरवरी 22 -- रोजे में बीमारी की हालत में इंजेक्शन लगवाने या ग्लूकोज एवं खून चढ़वाए जाने से रोजा नहीं टूटता। इतना ही नहीं रोजे की हालत में दांत की गंभीर बीमारी का इलाज कराया जा सकता है। वहीं मां अपने नवजत शिशु को दूध भी पिला सकती है। दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने बताया कि माह-ए-रमजान की इबादत खुद सेहत के लिए है। कहा कि रोजे प्रत्येक बालिग मर्द और औरत पर फर्ज हैं लेकिन गंभीर बीमारी की हालत में इन्हें कजा (छोड़ देना)करने की भी इजातत है। बताया कि रोजे की हालत में इंजेक्शन लगवाया जा सकता है और ग्लूकोज के माध्यम से दवा दी जा सकती है। क्योंकि इस माध्यम से दी जाने वाली दवाएं इंसान के मैदे तक नहीं जाती हैं। मौलाना सुफियान कासमी ने बताया की रोजे की हालत में यदि दांत दर्द कर रहा हो और उसको निकलवाने की जरुरत हो तो उसे निकल...
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