हाजीपुर, फरवरी 21 -- वैशाली। सं.सू. ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध वैशाली स्थित रैलिक स्तूप की गिरी हुई चाहरदीवारी का पुनः निर्माण कार्य इन दिनों कराया जा रहा है। यह कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अंचल पटना के अधीन कराया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी केपी इंटरप्राइजेज पटना को दी गई है। लगभग 40 लाख रुपए की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य प्राक्कलन के अनुरूप नहीं कराया जा रहा है। उनके अनुसार चाहरदीवारी के लिए जहां 10 फीट गहरा गड्ढा खोदा जाना है, वहां मात्र 6 से 7 फीट ही खुदाई की जा रही है। साथ ही पिलर निर्माण में 12 एमएम का रॉड की जगह 10 एम एम का उपयोग किए जाने और पुराने ईंट लगाए जाने की भी शिकायत की गई है। लोगों का आरोप है कि बालू समेत अन्य सामग्री भी म...
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