नई दिल्ली, जनवरी 28 -- मौनी अमावस्या पर संगन स्नान को जाते समय पालकी रोके जाने और बटुक शिष्यों के अपमान के खिलाफ पिछले 10 दिन से अपने शिविर के बाहर बैठे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को माघ मेला छोड़ काशी के लिए प्रस्थान किया। इसके पहले प्रशासन द्वारा उन्हें मनाने की कोशिश के तौर पर कुछ प्रस्ताव दिए गए जिन्हें उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। शंकराचार्य ने कहा कि हमको लगा कि अब यहां पर बैठना ठीक नहीं है। इनकी नीयत अभी भी पछतावे या अपने अपराध को स्वीकार करने की नहीं है। ये अभी भी अपनी अकड़ पर ही रहना चाहते हैं। केवल सरकारी रेवड़ी बांटकर यह हमको अपने जाल में फंसाना चाहते हैं इसलिए हमने निर्णय लिया कि हम तत्काल यहां से निकल जाएं। उन्होंने कहा कि किसकी जीत है और किसी हार है, यह समय बताएगा। यह सनातन धर्म की जनता है। अभी ...
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