नई दिल्ली, जनवरी 28 -- भारतीय रेलवे ने अपने दो दशक पुरानी परंपरा को लाल झंडी दिखा दी है। इसके तहत रिटायर होने वाले रेलकर्मियों को चमकदार गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा। इस मेडल को लंबी सेवा का प्रतीक माना जाता था। रेल मंत्रालय ने इस बाबत बुधवार को सर्कुलर जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस परंपरा की शुरूआत मार्च 2006 में की गई। सामान्य सेवानिवृत्ति या वीआरएस लेने वाले सभी कर्मियों को पदक की बनावट में 20 ग्राम वजन (99.9 फीसदी शुद्ध) चांदी का पदक दिया जाता रहा है। इस पर सोने की परत चढ़ी होती है। पदक पर एक तरफ भारतीय रेलवे का लोगो और दूसरी तरफ जोन या यूनिट का नाम लिखा होता है। सर्कुलर में कहा गया है कि क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों के पास जो पदक स्टॉक में बचे हैं, उन्...