लखीसराय, फरवरी 21 -- बड़हिया। जीवन और मोक्ष को प्रदान करने वाली मां गंगा की पहचान उसकी अविरल धारा से है। गंगा का प्रवाह केवल जल का प्रवाह नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और सभ्यता का संरक्षण भी है। परंतु विडंबना यह है कि जन-जन को जीवन देने वाली मां गंगा आज स्वयं अपने अस्तित्व को बचाने के लिए मानो हर किसी से प्रार्थना कर रही है। हाल के वर्षों में बड़हिया के पूर्वी तट से होकर बहने वाली गंगा की उपधारा अब अपनी पहचान खोती जा रही है। स्थिति यह है कि यह धारा अब साल में केवल तीन से चार महीने, वह भी बाढ़ के मौसम में दिखाई देती है। शेष महीनों में यह धारा पूरी तरह सूखकर सफेद बालू से भरी खाई में तब्दील हो जाती है। नतीजतन गंगा की गोद आज सफेद रेत से भर गई है, और इन्हीं रेत के ढेरों के बीच गंगा हांफ रही है। योजनाएं बहुत पर परिणाम नगण्य : ज्ञात हो कि...