गंगापार, फरवरी 15 -- कस्बा भारतगंज के गारोपुर में शनिवार को बाद नमाज़-ए-ईशा आयोजित रूहानी महफ़िल इश्क़ और मोहब्बत के रंग में रंगी नजर आई। सूफियाना कलाम और नातिया अशआर से सजी इस महफ़िल में शायरों ने जब अपने जज़्बात पेश किए तो समा पूरी तरह रूहानी हो उठा। शायर सूफी खाने आलम नक्शबंदी ने जब पढ़ा "कर दो करम सूफ़ी अहमद सवारियां, तरसत है नैना हमार हो, सपनों में आजा ओ महाराजा, मिल जाए चैन ओ करार हो." तो अकीदतमंद झूम उठे। शायर खालिद हसन ने भी अपने कलाम से महफ़िल में चार चांद लगाए। सदारत बिहार के जिला सीवान से तशरीफ लाए पीर-ए-तरीकत सूफी निशार नक्शबंदी ने की। अपने खिताब में उन्होंने इंसानियत, भाईचारे और मोहब्बत के पैगाम को आम करने पर जोर दिया। मेहमान-ए-खुसूसी पीर-ए-तरीकत सूफी शकील हसन ने कहा कि सूफी परंपरा समाज में अमन, शांति और आपसी सद्भाव की बुनिया...