लखनऊ, मई 5 -- कार्ल मार्क्स की 207 वीं जयंती पर जन संस्कृति मंच लखनऊ की ओर से इतिहास बोध और वैज्ञानिक चेतना पर वार्ता हुई। सिटी स्टेशन स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने अपनी बात रखी। लेखक असगर मेहदी ने कहा कि वैज्ञानिक चेतना का संबंध जितना विज्ञान के विकास से है, उससे अधिक मानव समाज के विकास की ऐतिहासिकता से है। मनुष्य की चेतना में जड़ जमाए रूढ़िवादी विचारों को वैज्ञानिक तर्कों के आधार पर कुछ कम तो किया जा सकता है लेकिन खत्म नहीं किया जा सकता है। इन विचारों का एक सामाजिक आर्थिक राजनीतिक आधार होता है। इस अवस्था के बदलाव की प्रक्रिया में ही मानव समाज अधिक तार्किक और मानवीय होता जाता है। जसम के कौशल किशोर ने कहा कि आजादी के बाद नेहरू के नजरिए में वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह बताता है कि मनुष्य को किस दिशा में यात्रा करनी चाहिए।...
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