नई दिल्ली, जनवरी 27 -- रिश्ते केवल भावनाओं से नहीं बल्कि धैर्य, समझ और समय से टिकते हैं। प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास रिश्तों को समझाने के लिए एक बेहद सरल लेकिन गहरा उदाहरण देते हैं- दूध से घी बनने की प्रक्रिया, जहां हर चरण हमें एक जरूरी जीवन-पाठ सिखाता है। उनके अनुसार, हर रिश्ता शुरुआत में दूध जैसा होता है, जब वही रिश्ता समय के साथ ठहरता है तो दही बनता है और संघर्षों से गुजरकर मक्खन। अंत में, जीवन की आग में तपकर वही रिश्ता घी बनता है। जानें इसके बारे में विस्तार से-सबसे पहला चरण है दूध। दूध ताजा, सुंदर और शुद्ध होता है, लेकिन बहुत नाज़ुक भी। जरा सी गर्मी, थोड़ी सी लापरवाही और दूध उफन कर गिर जाता है। कई रिश्ते भी ऐसे ही होते हैं- एक छोटी-सी गलतफहमी, एक कड़वा शब्द या अहंकार और रिश्ता टूट जाता है। ऐसे रिश्तों म...