लखीसराय, जनवरी 6 -- लखीसराय, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। स्थानीय प्रसिद्ध शिव मंदिर अशोक धाम में शनिवार से चल रहे नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को मोरारी बापू ने एक बार फिर शृंगी ऋषि के नाम से प्रवचन आरंभ व समापन किया। "शृंगी रिषिहि वशिष्ठ बुलावा। पुत्रकाम शुभ जग्य करावा।। भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनी चरु कर लीन्हें।। वशिष्ठ कछु हृदय बिचारा। सकल काजु भा सिद्ध तुम्हारा।।" तीसरे दिन की पूरी कथा के दौरान इस दोहे को श्रद्धालुओं के साथ बार-बार दोहराया। कथा का आरंभ उन्होंने एक जिज्ञासु श्रद्धालु के प्रश्न का जिक्र करते हुए किया। जिसमें श्रद्धालु ने उनसे पूछा मैं 15 साल से आपकी कथा नियमित सुन रहा हूं, कभी व्यासपीठ नहीं गया। कथा सुनने का क्या परिणाम है। शृंगी ऋषि प्रसंग व इसी प्रश्न के इर्द-गिर्द पुरी कथा को संपन्न किया। अंधकार को...
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