बाराबंकी, दिसम्बर 14 -- रामसनेहीघाट। टिकैतनगर कस्बे में चल रही राम कथा के दौरान राम वनवास का इतना सचित्र वर्णन किया गया कि सभी श्रोता रो पड़े। कथा व्यास अतुल कृष्ण जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने कुल की मर्यादा को ध्यान में रखकर व अपने पिता के वचन की रक्षा के लिए प्रसन्न होकर सारा राज-पाट त्याग कर वन चले गये। इससे हमें सीख लेनी चाहिए कि हमें स्वयं की चिंता न करते हुए यदि जरूरत पड़े तो अपने परिवार, समाज व देश के लिए सब कुछ त्याग देना चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होने कहा कि आज के बुजुर्गों को राजा दशरथ से प्रेरणा लेनी चाहिए और शरीर में ताकत व आंख की रोशनी रहते ही सारी जिम्मेदारी अपने उत्तराधिकारी को सौंपकर भगवान के सुमिरन में लग जाना चाहिए। कौशिल्या के उपर प्रकाश डालते हुए पूज्यश्री ने क...