जौनपुर, फरवरी 25 -- जलालपुर, हिन्दुस्तान संवाद। अक्सर जीवन की कठिन परिस्थितियों में भ्रम या सामाजिक दबाव के कारण व्यक्ति अपने आध्यात्मिक मार्ग से भटक जाता है। लेकिन राम और हनुमान का अर्थ ही आनंद और शांति है। जब कोई भक्त पुनः राम की शरण में आता है तो यह केवल धार्मिक वापसी नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि का उत्सव है।यह बातें क्षेत्र के पूरेव गांव में स्थित बड़कू हनुमान मंदिर आश्रम मंगलवार को आयोजित सांस्कृतिक महामिलन समारोह के दौरान डॉ.राजीव गुरुजी राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपथ विशाल भारत संस्थान के पंथचार्य ने कही। कहा कि प्रभु श्री राम ने शबरी के जूठे बेर खाए और केवट को गले लगाया यह दर्शाता है कि उनके दरबार में भटकाव का कोई स्थायी स्थान नहीं है, केवल भाव का स्थान है। आज जो भाई-बहन फिर से राम भक्ति से जुड़ रहे हैं, वे समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि सत्...
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