बदायूं, अक्टूबर 1 -- बिल्सी। रामलीला के मंच पर सीता स्वयंवर हुआ। राजा जनक ने देश के कई राजाओं को आमंत्रित किया। धनुष यज्ञ में जनक का संकल्प था कि जो शिव जी के इस धनुष को तोड़ेगा। उसी के गले में मेरी पुत्री सीता वरमाला डालेगी। कई राजा और दुष्ट धनुष को हिला भी नहीं पाए। इस दौरान रावण का धनुष के नीचे हाथ दब गया। सब राजा परास्त होकर अपने-अपने सिंहासन पर बैठ जाते हैं। इस दौरान जनकजी कहते हैं आप लोग आशा छोड़कर अपने घर जाओ। इस स्वयंवर में क्या देवता लोग भी मनुष्य का शरीर धारण कर पधारे हैं। उन्होंने कहा हम किससे कहे बलशाली। हमारा विश्व तो पृथ्वी वीरों से खाली है। यह सुन लक्ष्मण ने कहा सच्चे योद्धा सच्चे क्षत्रीय अपमान नहीं सह सकते हैं। गुरु विश्वामित्र श्रीराम को धनुष तोड़ने की आज्ञा देते हैं। धनुष तोड़ने के बाद सीता राम जी के गले में माला डालकर स्वय...
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