सिद्धार्थ, फरवरी 10 -- सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता। डबल इंजन की भाजपा सरकार में रामराज्य की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों का भव्य विकास और पर्यटन को बढ़ावा इसका प्रमाण है। लेकिन इसी रामराज्य की आत्मा माने जाने वाले रामलीला और रासलीला के कलाकार आज भी आर्थिक उपेक्षा का शिकार हैं। सिद्धार्थनगर समेत पूर्वांचल क्षेत्र में रामलीला और रासलीला का गहरा सांस्कृतिक इतिहास रहा है। दशकों से ये कलाकार मंच पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और श्रीकृष्ण के चरित्रों को जीवंत कर समाज में मर्यादा, भक्ति और संस्कार का संदेश देते आ रहे हैं। बावजूद इसके, मंच से उतरते ही इन्हीं कलाकारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। बांसी तहसील के बनौली गांव में आयोजित रामलीला...
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