पटना, जुलाई 22 -- सूबे में एक ओर जहां 155 स्कूल ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जहां पेयजल के कोई स्रोत नहीं हैं। वहीं कई ऐसे भी स्कूल हैं जहां पेयजल के स्रोत हैं, लेकिन मरम्मत की वजह से खराब पड़े हैं। राज्य में लगभग 76 हजार स्कूलों में से 12% स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों और शिक्षकों के लिए पेयजल की सुविधा के लिए लगे चापाकल से पानी नहीं आता है। लगभग 78 हजार स्कूलों में से नौ हजार स्कूलों में लगे चापाकल खराब हैं। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने आने वाले बच्चों को अन्य स्त्रोत जैसे टैप वॉटर या घर से बोतल में पानी लाना पड़ता है। इनमें ज्यादातर गया, कैमूर, औरंगाबाद और रोहतास जिले के स्कूल शामिल हैं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई रिपोर्ट बताती है कि बिहार में अब भी सरकारी विद्यालयों में चापाकल ही पेयजल का मुख्य स्त्रोत है। आरटीआई के आंकड़ों के अनुसार बिह...
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