लखनऊ, जनवरी 2 -- राजस्व परिषद के अधिकारियों के सामने नए वर्ष में पैमाइश से जुड़े लगभग 68 हजार लंबित वादों का तेजी से निस्तारण कराने की भी चुनौती होगी। भूमि पैमाइश के मामलों में लेखपाल व अन्य अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठते रहते हैं। पैमाइश के मामलों में आपत्तियों के साथ ही अपील भी बड़ी संख्या में होती है। पैमाइश को गुणवत्तापरक न होने अथवा गलत होने के आरोप लगाकर भू-स्वामी उन्हें राजस्व परिषद में चुनौती देते हैं। पिछले वर्ष पैमाइश के मामलों में 1.72 लाख मामले पंजीकृत कराए गए थे। इनमें अधिकारियों ने 1.13 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण कराया था जबकि लगभग 68 हजार मामले लंबित रह गए थे। अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों में कमी लाने के लिए ही पैमाइश कराने में तकनीक का प्रयोग बढ़ाने के प्रयास लगातार हो रहे हैं। जिससे नाप-जोख व क्षेत्रफल को लेकर ...