अलवर, अक्टूबर 18 -- अलवर के गोविंदगढ़ थाने ने जिसे पर्दाफाश किया, वह कोई रातोरात की घटना नहीं थी बल्कि महीनों की योजना और परतदार जाल का परिणाम निकली। पुलिस की शुरुआती जानकारी और पीड़ित के बयान को जोड़कर दायरे का वो नक्शा तैयार किया जा सकता है जिसमें गिरोह ने ठोस तरीके से रचना, पहचान छुपाना और फिरौती वसूली की ठोस रणनीति अपनाई थी। घटना की शुरुआत 28 जून की रात हुई तब चार-पाँच लोग एक लाल बत्ती लगी गाड़ी लेकर धांधोली स्थित ई-मित्र दुकान पर पहुंचे। गिरोह ने खुलेआम खुद को हरियाणा पुलिस बताया; यह वैसी ही चाल थी जो भरोसा पैदा करने के लिए बरती जाती है। लाल बत्ती और पुलिस जैसे वेशभूषा ने दुकानदारों में भ्रम पैदा किया ताकि वे विरोध करने से बचें और आदेश मान लें। गिरोह ने पहले तो दुकानदार को डराया-धमकाया, फिर उसे जबरन गाड़ी में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान...
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