नई दिल्ली, फरवरी 10 -- मिर्गी (Epilepsy) को दशकों तक एक ऐसी बीमारी माना गया, जिसमें इलाज सीमित था और सामाजिक भ्रांतियां ज्यादा। लेकिन 2026 तक पहुंचते-पहुंचते तस्वीर तेजी से बदली है। इलाज अब सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं, बल्कि दिमाग के भीतर झांकने वाली तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेनेटिक्स और इम्प्लांटेबल डिवाइसेज़ ने इस बीमारी को नए सिरे से समझने का रास्ता खोल दिया है।दिमाग के रहस्यों से उठा पर्दा इलाज की इस कहानी की शुरुआत होती है एडवांस डायग्नोसिस से। अल्ट्रा-हाई-रिज़ॉल्यूशन 7T MRI जैसी तकनीकों ने न्यूरोलॉजिस्ट्स को दिमाग के उन सूक्ष्म घावों को देखने की क्षमता दी है, जो पहले नजरों से छूट जाते थे। यही वे घाव होते हैं, जो दवा-प्रतिरोधी मिर्गी की जड़ बनते हैं। अब सर्जरी की योजना ज्यादा सटीक है और जोखिम पहले से कम।'एक दवा सभी के लिए' का दौर...