नई दिल्ली, नवम्बर 29 -- शशि शेखर तेजस्वी यादव इन दिनों कटु आलोचनाओं के केंद्र में हैं, लेकिन वह अकेले नहीं हैं। उनसे पहले हरियाणा में हुड्डा और महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार चुनावी हार के बाद 'ट्रोलिंग' का विषय बने थे। क्या यह राजनीतिक जय-पराजय वंशवाद बनाम अन्य की लड़ाई है? यकीनन, ऐसा नहीं है। यदि परिवारवाद में खोट होता, तो हरियाणा और महाराष्ट्र में हार के साथ झारखंड में हेमंत सोरेन भी धूल-धूसरित हो गए होते। वह न केवल दोबारा सत्ता में लौटे, बल्कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पहले से ज्यादा सीटें हासिल कीं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर चुनाव जीतना है, तो चुनावी अश्वमेध पर निकले दलपतियों की रास थामने से पहले उनकी रणनीति की काट खोजनी होगी। हेमंत सोरेन ने मध्य प्रदेश की 'लाडली बहना' और महाराष्ट्र की 'माझी लाडकी बहीण योजना' की तर्ज पर झारखंड में 'मंई...