प्रयागराज, नवम्बर 24 -- प्रयागराज, कार्यालय संवाददाता। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग की ओर से आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन सोमवार को हुआ। मुख्य वक्ता भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ की गायन विभागाध्यक्ष एवं जयपुर-अतरौली घराने की गायिका प्रो. सृष्टि माथुर ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को रागों के स्वर-प्रयोग, प्रस्तुति शैली और रागों के पारस्परिक भेद के बारे में बताया। उन्होंने राग तोड़ी, मुल्तानी, पूरीया, मारवा, अहीर भैरव, नाईकी कनाडा, बागेश्री, मधुवंती और बिलासखानी तोड़ी जैसे विशिष्ट रागों के व्यापक स्वरूप और उनसे जुड़ी बंदिशें भी सिखाईं। प्रो. पं. प्रेम कुमार मल्लिक ने कहा कि निरंतर अभ्यास और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन ही संगीत साधना को परिपक्व बनाता है। प्रो. वीके राय (डीन, कला संकाय) ने क...