लखनऊ, जनवरी 5 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता कला और कलाकारों के बीच संवाद को सशक्त बनाने की दिशा में जानकीपुरम स्थित क्ले एन फायर स्टूडियो नौ दिवसीय राकू फायरिंग वर्कशॉप का समापन हुआ। जहां प्रतिभागी कलाकारों की राकू तकनीक से निर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। राकू विधा का इतिहास 16वीं शताब्दी के जापान से जुड़ा है, जहां इसका विकास चाय समारोह की सौंदर्य परंपरा के अंतर्गत हुआ। सादगी, अनिश्चितता और क्षणिक सौंदर्य राकू कला के मूल तत्व माने जाते हैं। समय के साथ यह तकनीक पश्चिमी देशों तक पहुंची और इसमें रिडक्शन फायरिंग जैसे प्रयोग जुड़े, जिससे राकू कलाकृतियों में अप्रत्याशित रंग, दरारें और धात्विक प्रभाव उभरकर सामने आते हैं। कार्यशाला में भाग लेने वाले चार राज्यों से 10 कलाकारों में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से रवि कश्यप (लखीमपुर), पा...