बेगुसराय, फरवरी 21 -- नावकोठी, निज संवाददाता। पवित्र माह रमजान शुरू है। यह एक माह का है। पहले दस दिनों का पहला अशरा (1 से 10 रोज़ा) रहमत और बरकत का दौर माना जाता है। इस अशरे में रोजेदार अल्लाह की विशेष कृपा और दया प्राप्त करने के लिए इबादत, तिलावत और नेक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस्लामी मान्यता के अनुसार रमजान का यह प्रारंभिक चरण बंदों पर अल्लाह की रहमतों की बारिश लेकर आता है, जिसमें हर नेक अमल का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। मस्जिदों में पांचों वक्त की नमाज़ के साथ तरावीह में भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हो रहे हैं। इमामों का कहना है कि पहला अशरा आत्मशुद्धि और आत्ममंथन का समय है, जब इंसान अपने गुनाहों से तौबा कर सच्चे दिल से अल्लाह की रहमत की दुआ मांगता है। रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि बुरी बातों औ...