गाजीपुर, फरवरी 23 -- गाजीपुर। रमजान का महीना विशेष अहमियत और बरकतों से भरा हुआ माना जाता है। मौलाना जाबिर अली क़ुम्मी ने बताया कि यह महीना पूरी तरह खुदा की इबादत के लिए समर्पित है और अपने गुनाहों से माफी मांगने का सर्वोत्तम समय है। रमजान इंसान को जहन्नम की आग से बचाने और नेक अमल के जरिए जन्नत तक पहुंचने का जरिया है। इस महीने में रिज़्क और रहमतों में इजाफा होता है। यह आत्मा और जिस्म को पाक-साफ करने, कुरान की तिलावत करने और उसके नूर का अनुभव करने का अवसर है। हजरत अली के अनुसार, रमजान अन्य सभी महीनों पर बरतरी रखता है। जिस तरह खुदा ने अहलेबैत को लोगों पर फज़ीलत दी, उसी तरह रमजान को दूसरे महीनों पर श्रेष्ठता प्राप्त है। रोज़ा केवल भूख-प्यास सहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक ढाल और आत्म-संयम का प्रतीक है। हजरत रसूले अकरम ने कहा कि रोजा दुन...
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