हाजीपुर, फरवरी 21 -- महुआ। ए.सं. रमजान का पाक महीना बीते गुरुवार से शुरू हो गया। दूसरे दिन पहले जुम्मा पर मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए अकीदतमंदों की भीड़ हुई। बताया गया कि इस महीने में रोजा रखना और तरावीह की नमाज अदा करना अल्लाह तआला द्वारा फरमाया गया है। रमजान का हर पहलू निराला है। यह महीना कई मायने में खास है, जो अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा, उच्च-नीच के भाव को दूर करता है और यह आपसी समानता का संदेश देता है। रोजा रूह (आत्मा) की पाकीजगी (आत्मशुद्धि) का बेहतरीन अमल (योग) है। इससे आदमी का तन, मन, वचन और कर्म पाक (पवित्र) होता है। रोजा का सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं है। बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह शरीर के लिए काफी फायदेमंद है। महुआ के डॉ महेश चौधरी, डॉ केसी विद्यार्थी, डॉ वी दयाल सिंह, डॉ सुरविन्द कुमार सिंह, डॉ मो शमीम अंसारी की दलील म...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.