मऊ, फरवरी 22 -- मऊ, संवाददाता। रमजान के पाक महीने में तीन अशरे (हिस्से) होते हैं। जिसमें पहला अशरा (1-10 रोजे) रहमत, दूसरा अशरा मगफिरत (गुनाहों से माफी) (11-20) और तीसरे अशरा (21-30) जहन्नम की आग से निजात दिलाना है। पहले अशरा चल रहा है। ऐसे में इबादतों का दौर जारी है। रोजेदारों और इबादतगारों से मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है। कुरआन की कसरत से तिलावत की जा रही है। मान्यता है कि रमजान के महीने में अल्लाह 70 गुना सवाब देता है। पहले अशरे में रोजेदार रोजा रखते हैं और अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। उन पर अल्लाह की रहमत होती है। रमजान में बुरी बातों और आदतों से बिल्कुल दूर रहना चाहिए। वहीं दूसरे अशरे में इबादतगारों को अपने गुनाहों से माफी मिलती है, अगर कोई इंसान रमजान के दूसरे अशरे में अपने गुनाहों की माफी मांगता है तो अन्य दिनों की मुकाबले अल्ला...
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