पूर्णिया, सितम्बर 9 -- पूर्णिया, वरीय संवाददाता। यकीन नहीं हो रहा। 14 साल तक कहां-कहां नहीं ढूंढा। आज मेरी 'लाडो मेरे आंखों के सामने है। यह कहते धरम सिंह की आंखें छलक उठती हैं। वह कहते हैं कि रब की मेहर के कारण ही बलजिंदर आज मेरे आंखों के सामने है। यह कहते हुए बुजुर्ग पिता अपनी बेटी को सीने से लगा लेते हैं। पंजाब के गांव सिंधवा (कपूरथला) से अपने घर से 23 अक्टूबर 2011 को निकली बलजिंदर अब वापस अपने गांव लौट चुकी है। माता-पिता बलजिंदर की रिश्ता कहीं पक्की कर चुके थे, मगर उसे यह मंजूर नहीं था। नतीजन वह डिप्रेशन में चली गयी। मानसिक स्थिति अचानक खराब होने के कारण बिना कुछ बताये वह घर से रवाना हो गयी थी। परिवार के द्वारा बहुत तलाश की गयी। मगर निराशा हाथ लगी। इसके बाद धरम सिंह के द्वारा निकट के थाना कपूरथला में मामला दर्ज करवाया गया था। समाज कल्य...
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