नई दिल्ली, फरवरी 20 -- रत्न शास्त्र ज्योतिष की एक प्राचीन शाखा है, जिसमें नवग्रहों (सूर्य से केतु तक) के साथ रत्नों का गहरा संबंध बताया गया है। प्रत्येक रत्न ग्रह की विशिष्ट किरणों को अवशोषित कर शरीर में प्रवाहित करता है, जिससे ग्रह मजबूत होता है। नवरत्न विशेष महत्व रखते हैं। ये रत्न केवल सजावट नहीं, बल्कि ग्रह दोष निवारण के उपाय हैं। रत्न धारण से आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, धन और सुख में वृद्धि हो सकती है। लेकिन बिना ज्योतिष सलाह के रत्न पहनना जोखिम भरा है। आइए विस्तार से जानें।रत्न और ग्रहों का संबंध ज्योतिष में हर ग्रह का अपना रत्न होता है। सूर्य का माणिक, चंद्रमा का मोती, मंगल का मूंगा, बुध का पन्ना, गुरु का पुखराज, शुक्र का हीरा, शनि का नीलम, राहु का गोमेद और केतु का लहसुनिया। ये रत्न ग्रह की ऊर्जा को बढ़ाते हैं। यदि कुंडली में कोई ग्रह ...